[Maithili Vidyapati Song] Kakhan Harab Dukh Mor




[ http://www.youtube.com/rajnipallavi/videos ]
Kakhan Harab Dukh Mor [ Singer : Rajni Pallavi ]
A Maithili Vidyapati’s Geet

The song “Kakhan Harab Dukh Mor” is penned by great Maithili poet Mahakavi Vidyapati. This song doesn’t need any introduction of its own as it has been one of the most celebrated songs in Mithila, representing strong belief and cult followership of lord Shiva in Maithili society.
If you like this song, please do share it with your family and friends. I will count this favor as best reward for my effort.
Regards
Rajni Pallavi

“हे भोलानाथ, कखन हरब दुःख मोर” महाकवि विद्यापति द्वारा लिखल गीत श्रोतागणक सेवा मे प्रस्तुत कय रहल छी | हम भरिसक प्रयास कएल अछि जे अपने लोकनि क’ गीत सुनय मे नीक लागय | गीत मे सुन्दर ढंग सं वाद्य यन्त्र क’ उपयोग कएल अछि | आशा अछि अपने लोकनि क’ गीत पसंद होय |
श्रोतागण सं अपेक्षा अछि जे जों अपने लोकनि क’ गीत पसंद होए त’ गीत क’ शेयर जरुर करी |
शुभकामनाक संग
रजनी पल्लवी

भावार्थ 
हे भोलानाथ ! हमरा एहि दुःख सं कखन छुटकारा देब । हमर दुखे मे जनम भेल आ ई जीबन दुखे मे बितल । सुख त’ सपनों मे कहियो नहि भेल । हे भोलानाथ, अछत, चानन ओ गंगाजल, बेलपात सं तोहर हम पूजा अर्चना करब । एहि संसार–सागर क’ कोनो थाह नहि छैक, हे शिव, हम एहि दुखक अथाह सागर मे डूबि रहल छी, अहाँ हमर डेन ध’ लिअ । विद्यापति कहैत छथि अहाँक बिना हमर कोनों गति नहि अछि । हमरा अभयवर प्रदान करू ।

Lyrics – https://www.facebook.com/photo.php?fbid=291934707506142&set=a.165501350149479.44380.139473236085624&type=1&theater


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42 Comments

  1. भावना के प्रवल धारा में प्रवाहित भय रहलौं हें ।एहि धारा में महादेव सेहो अपन भांग धथूर विसैर जेता । जय महादेव।

  2. सभ सँऽ सुनर अपन मिथिला, अपन सांस्कृति आ अपन संस्कार . एहि धरती के सत सत प्रणाम जे एहि ठाम हमर जन्म भेल।

  3. !!🚩हर हर महादेव🚩!!
    🌺शुभ प्रभात मिथिलावासी🌺

    सावन केर पहिल सोमवार भोला
    बाबा सब गोटे केर मनोकामना
    पूरा करैत..!🙏

    कखन हरब दुख मोर,
    हे भोलानाथ..!
    कखन हरब दुख मोर,
    हे भोलानाथ..!

    दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल,
    सुख सपनेहु नही भेल,
    हे भोलानाथ..!
    एहि भव-सागर थाह कतहु नहि,
    भैरब धरु करुआर,
    हे भोलानाथ..!
    भनई बिद्यापति मोर भोलानाथ गति,
    करब अन्त मोहि पार,
    हे भोलानाथ..!
    कखन हरब दुख मोर,
    हे भोलानाथ..!

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